दिल्ली सरकार ने GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) के जरिए होने वाली स्टांप ड्यूटी चोरी और प्रॉपर्टी फ्रॉड को रोकने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। अब करीबी रिश्तेदारों के अलावा अन्य किसी के नाम पर बने GPA की सीधे रजिस्ट्री नहीं होगी; उन्हें जांच के लिए कलेक्टर के पास भेजा जाएगा और संदिग्ध मामलों में पूरी कन्वेंस डीड (सेल डीड) जितनी स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी।
दिल्ली प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के नियम अब पूरी तरह बदल चुके हैं। दिल्ली सरकार ने प्रॉपर्टी फ्रॉड और लैंड माफिया पर लगाम कसने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब तक लोग जिस जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल करके लाखों रुपये की स्टांप ड्यूटी चोरी कर लेते थे, सरकार ने उस लूपहोल को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर, राजधानी के सभी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस को नए दिशानिर्देश तुरंत लागू करने के लिए कह दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब किसी भी इम्मूवेबल प्रॉपर्टी को GPA के जरिए घुमाकर बेचना नामुमकिन होगा। अगर आपकी फाइल में जरा सी भी हेराफेरी लगी, तो उसे सीधे कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेज दिया जाएगा और आपको पूरे कन्वेंस डीड यानी सेल डीड के बराबर टैक्स चुकाना होगा।
दिल्ली सरकार ने GPA रजिस्ट्रेशन पर इतनी सख्ती क्यों की है?
सालों से दिल्ली के रियल एस्टेट मार्केट में एक खेल चल रहा था। लोग लाखों रुपये की स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए सीधे रजिस्ट्री कराने के बजाय सिर्फ एक GPA साइन कर देते थे। कागजों पर दिखाया जाता था कि यह सिर्फ देखरेख के लिए है, लेकिन हकीकत में पैसे का लेन-देन हो चुका होता था और खरीदार को घर का कब्जा भी मिल जाता था।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी सेल एग्रीमेंट के फर्जीवाड़े से सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था। सबसे बड़ा नुकसान आम जनता का था, क्योंकि ऐसी प्रॉपर्टीज के पेपर पक्के नहीं होते थे और लोग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते थे। इसी को रोकने के लिए यह सख्त फैसला लिया गया है।
नए नियमों के तहत सब-रजिस्ट्रार किन बातों की जांच करेंगे?
अब जब भी कोई GPA रजिस्ट्रेशन के लिए सब-रजिस्ट्रार के सामने आएगा, तो अधिकारी उसकी चील जैसी निगाहों से जांच करेंगे। वे दस्तावेज में मुख्य रूप से 4 रेड फ्लैग्स (चेतावनी के संकेत) ढूंढेंगे:
- पैसों का लेन-देन (Monetary Consideration): क्या इस कागज़ में कहीं भी पैसों के लेन-देन का जिक्र है?
- कब्जा सौंपना (Transfer of Possession): क्या खरीदार को प्रॉपर्टी पर कब्जा दिया जा रहा है?
- अपरिवर्तनीय (Irrevocable): क्या इसमें लिखा है कि इस पावर को कभी वापस नहीं लिया जा सकता?
- परमानेंट राइट्स: क्या सामने वाले को प्रॉपर्टी बेचने, गिफ्ट करने या गिरवी रखने का हमेशा के लिए अधिकार दिया जा रहा है?
अगर इनमें से एक भी बात सच निकली, तो सब-रजिस्ट्रार उस डॉक्यूमेंट को वहीं रोक देगा।
क्या खून के रिश्तों को इस नियम से छूट मिलेगी?
हाँ, सरकार आम जनता को परेशान नहीं करना चाहती। अगर आप सचमुच अपने किसी बेहद करीबी पारिवारिक सदस्य को अपनी प्रॉपर्टी की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं, तो आपको इस कड़े प्रोसेस से नहीं गुजरना होगा। इन करीबी रिश्तेदारों में शामिल हैं:
- माता-पिता
- पति या पत्नी
- बेटा और बेटी
- भाई और बहन
अगर आप इनमें से किसी के नाम पर GPA करा रहे हैं, तो सब-रजिस्ट्रार इसे बिना किसी रुकावट के सीधे रजिस्टर कर देगा। लेकिन अगर नाम इनके बाहर का हुआ, तो फाइल सीधे कलेक्टर के पास जाएगी, जिन्हें 30 दिनों के भीतर फैसला सुनाना होगा।
अगर कोई अधिकारी इन नियमों को नहीं मानता, तो क्या होगा?
इस बार सरकार किसी भी मूड में ढील देने को तैयार नहीं है। अगर किसी सब-रजिस्ट्रार ने बिना जांच किए या कलेक्टर को भेजे बिना ऐसी किसी संदिग्ध फाइल को पास कर दिया, तो उस अधिकारी के खिलाफ तुरंत सख्त दंडात्मक (Penal) और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर ऑफिस में एक अलग से रजिस्टर बनाया जा रहा है और इसकी हर महीने की रिपोर्ट सीधे हेड ऑफिस भेजी जाएगी।
साथ ही, जनता की सुविधा के लिए एक ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी अगले एक महीने में तैयार हो जाएगा, ताकि आप घर बैठे देख सकें कि आपकी रुकी हुई फाइल का स्टेटस क्या है।
अनधिकृत कॉलोनियों की सूरत बदलने के लिए सरकार ने मांगे अतिरिक्त फंड!
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त करने के साथ-साथ, दिल्ली सरकार राजधानी के लाखों लोगों को एक और बहुत बड़ी खुशखबरी देने की तैयारी में है। अगर आप दिल्ली की किसी अनधिकृत या ‘कच्ची’ कॉलोनी में रहते हैं, तो बहुत जल्द आपके इलाके की पूरी तस्वीर बदलने वाली है।
दिल्ली सरकार ने इन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित (regularizing irregular colonies) करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त फंड (लगभग ₹100 करोड़) की मांग की है। यह पैसा संशोधित PM-UDAY योजना को धरातल पर उतारने के लिए मांगा गया है।
इसका आम जनता और प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या असर होगा?
इस फंड के मिलते ही दिल्ली के रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे में बहुत बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
- मालिकाना हक का रास्ता साफ: इस योजना के तहत अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी प्रॉपर्टी के पक्के और लीगल मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे जाएंगे।
- बुनियादी सुविधाओं का विकास: कॉलोनियों के नियमित होते ही वहां पक्की सड़कें, सीवर लाइन, पानी की सप्लाई और पार्कों जैसी सरकारी सुविधाओं का विकास तेजी से शुरू हो सकेगा।
- आसान होगी रजिस्ट्री: एक बार जब ये कॉलोनियां पूरी तरह नियमित हो जाएंगी, तो यहां रहने वाले लोग भी बिना किसी डर या लूपहोल के, सीधे और पारदर्शी तरीके से अपने घरों की लीगल प्रॉपर्टी रजिस्ट्री करा सकेंगे।
सरकार एक तरफ जहां GPA के जरिए होने वाले फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी पर सख्त ‘हंटर’ चला रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के आम नागरिकों को उनके आशियाने का लीगल हक देकर शहर का कायाकल्प करने में जुटी है। बहुत जल्द दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट और इन कॉलोनियों में रहने वाले करोड़ों लोगों की जिंदगी में एक सकारात्मक और बड़ा बदलाव आने वाला है!